
राठौड़ हवेली का स्टडी रूम रात के सन्नाटे में डूबा हुआ था। कमरे में लगी महंगी झूमरों की मद्धम पीली रोशनी अवनि की मखमली रंगत पर पड़ रही थी। 19 साल की अवनि साटन का बेहद हल्का, ढीला गुलाबी नाइटसूट पहने टेबल पर झुकी हुई थी। उसकी पीठ पर बिखरी काली जुल्फ़ें, सिन्दूर से भरी माँग और गले में जगमगाते तीन-तीन हीरों के मंगलसूत्र उसके रूप को और भी मदहोश बना रहे थे।
अवनि लैपटॉप में अपने कॉलेज का असाइनमेंट टाइप कर ही रही थी कि पास रखे उसके फोन की स्क्रीन जगमगा उठी। स्क्रीन पर कॉलेज के सहपाठी का मैसेज था—“अवनि, नोट्स भेजने के लिए थैंक्स! कल कैंटीन में मिलते हैं।”



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