
हिमाचल प्रदेश की बर्फीली पहाड़ियों के बीच एक छोटा सा गाँव बसा हुआ था। गाँव के एक किनारे पर बने एक जर्जर और सीलन भरे कमरे में **19 साल की अवनि** रहती थी।
अवनि महज़ 19 साल की एक मासूम लड़की थी, जो बी.ए. प्रथम वर्ष में पढ़ना चाहती थी। उसकी आँखों में किताबों की दुनिया और अपने पैरों पर खड़े होने की तड़प थी। अवनि की खूबसूरती कोई साधारण खूबसूरती नहीं थी; वह कुदरत की तराशी हुई एक ऐसी मखमली मूरत थी जिसे देखकर कोई भी मर्द अपनी साँसें भूल जाए। उसकी त्वचा बर्फ जैसी सुफ़ेद और मखमली गोरी थी। बड़ी-बड़ी, गहरी हिरनी जैसी झील सी आँखें, जिन पर घनी-लंबे पलकों का साया रहता था। उसके होंठ किसी ताज़े खिले गुलाब की पंखुड़ियों की तरह कुदरती तौर पर गुलाबी और रसीले थे। जब वह चलती, तो उसकी पतली कमर पर लहराती उसकी घुटनों तक लंबी, काली और रेशमी ज़ुल्फ़ें उसकी नज़ाकत को और बढ़ा देती थीं। उसका कसा हुआ, सुडौल जिस्म किसी संगमरमर की तराशी हुई परी जैसा दिखता था।



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